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एस.आर.एन. इन्टरनेशनल स्कूल जगतपुरा में प्राणिक हिलिंग से शरीर संतुलन व ध्यान सिखाया

एस.आर.एन. इन्टरनेशनल स्कूल जगतपुरा में प्राणिक हिलिंग से शरीर संतुलन व ध्यान सिखाया

प्राणिक हिलिंग कार्यक्रम द्वारा उमेश मूल रजानी ने विधार्थियों को शरीर संतुलन, स्वयं उपचार व ध्यान मुद्राओं का अभ्यास कराया। ध्यान की सभी मुद्रा सिखाई व शरीर के चक्रो को भी बताया। इन मुद्राओं के अभ्यास से माता-पिता,भाई-बहिन,दोस्त व परिवार के साथ स्वस्थ सम्बन्ध होते है,साथ ही मानसिक तनाव कम हो जाता है।
इस कार्यक्रम के द्वारा विधार्थियों ने जाना कि बिना दवा के रोग ठीक करने की कला प्राणिक हिलिंग है।प्राणशक्ति उपचार एक पुराना विज्ञान एवं उपचार की एक कला है,जो सम्पूर्ण शरीर के लिए प्राणशक्ति जैसे कि सूक्ष्म ऊर्जा का उपयोग करती है।प्राण को बढाने हेतु प्राणायाम करते है।यह विद्या कोई परासामान्य विद्या नही, बल्कि प्रकृति के उन नियमों पर आधारित है जिससे हम अनभिज्ञ है। यह प्राणिक हिलिंग एक वैज्ञानिक ऊर्जा पर आधारित है, प्राण शरीर और इसमें स्थित चक्रों को देख कर रोग का पता लगाया जाता है। इलाज के पूर्व इसी के द्वारा जांच की जाती है। इस ऊर्जा से कई प्रकार के रोगों का उपचार किया जाता है।जैसा की -एक्यूप्रेशर , स्पर्ष चिकित्सा, मानसिक उपचार,एक्यूपन्चर,चुम्बक थैरेपी आदि अनेक चिकित्सा प्रणालियां प्राण ऊर्जा पर ही आधारित है।प्राण सूक्ष्म ऊर्जाएं होती है जो स्थूल शरीर बनाती है, इसी सूक्ष्म शरीर को आभामण्डल कहते है। इसमे रोगी को स्पर्ष नही किया जाता नही कोई दवाई दी जाती है।
कार्यक्रम का उद्देष्य प्राणिक हिलिंग द्वारा विधार्थियों को शरीर संतुलन की ध्यान मुद्राओं से जोडना, बिना स्पर्ष किये व दवाई के बिना स्वस्थ जीवन जीना सिखाना है।
प्राचार्या श्रीमती उषा शर्मा ने बच्चों को संबोधित करते हुए बताया कि इस प्रकार के कार्यक्रम से विधार्थी हमारे प्राचीन भारतीय विज्ञान की जानकारी लेकर नये विज्ञान से जुडते है।

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