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सुबोध पब्लिक स्कूल, रामबाग – एनुअल डे – नवम्बर 10, 2017

रामबाग स्थित सुबोध पब्लिक स्कूल का 32वां वार्षिकोत्सव ‘गीत गाया पत्थरों ने…..‘ थीम पर आधारित रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम में लगभग 350 स्टूडेंट्स कीे प्रस्तुति ने उपस्थित दर्शको को मंत्र-मुग्ध कर दिया।

सभ्यताओं के उदय से पतन के गवाह, ये पत्थर भले ही शांत हों लेकिन इतिहास के पन्नों में अपनी जगह बनाये हुये हैं । इसी को चरितार्थ करते ‘गीत गाया पत्थरों ने…..‘ एक प्रयास है, भारत एवं इससे जुड़े इतिहास, चाहे वो प्राचीन सभ्यता के उद्भव से मुगलों के आगमन तक का समय हो, या ब्रिटिश भारत से आधुनिक भारत तक का सफर हो……. विभिन्न विदेशी संस्कृतियों को समेटे ये पत्थर बेजुबान होकर भी हमारी प्रेरणा के स्त्रोत रहे हैं ।

इन्हीं भावनाओं पर आधारित आज के कार्यक्रम का आगाज़ ‘णमोकार मंत्र‘ के साथ प्लेग्रुप एवं प्राइमरी के बच्चों की अभिलाशा…… सूरज सा दमकूँ मैं, चंदा सा चमकूँ मैं…. की प्रस्तुित द्वारा बालमन की अठखेलियों को दर्शाया गया । वहीं दूसरी ओर भजन तेरा-मेरा मेरा-तेरा…. की प्रस्तुति ने सभी को भाव-विभोर कर दिया ।

ये हमारी संस्कृति की खूबसूरती है कि जब-जब किसी संकट ने हमें घेरा है, हमने चुनौतियों को पाथेय बनाकर उपलब्धियों का कठिन सफर भी तय किया है…. जीवन रूपी संग्राम की दुदुंभी बजाते हुये सीनियर स्टूडेंट्स की प्रस्तुति मंगल-मंगल….. ने खुशी का सा माहौल पैदा कर दिया ।

रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम की अगली कड़ी में धरती, प्रकृति ओर मनुष्य के सृजन की बेमिसाल यात्रा को संगीत के माध्यम से प्रदर्शित किया गया । जहाँ एक ओर पृथ्वी के सृजन को मन-मोहक नृत्य के द्वारा मैं पत्थर हूँ….. इसीलिये सब सहता हूँ…. की आकर्षक प्रस्तुति दी गई, वहीं दूसरी ओर विपरीत परिस्थितियों में अडिग रहकर अपनी पहचान को बनाये रखने में सक्षम पत्थरों की महती भूमिका को ये कौन चित्रकार है…. नृत्यगीत के माध्यम से परोसा गया ।

इस तरह विकास की विभिन्न कड़ियों के बाद संसार के जीवन-चक्र को परिलक्षित करता आदिवासी नृत्य ने हमारी प्राचीन संस्कृति की झलक प्रस्तुत की वहीं सभ्यता के उत्सर्जन में नारी के योगदान का चित्रण प्रकृति के समकक्ष देवी..देवी… नृत्य में देखने को मिला । प्रगति और अवनति की परिणिति का साक्षात् स्वरूप आरम्भ है… प्रचंड है… नृत्य के माध्यम से प्रदर्शित किया गया । हमारी आस्था के केन्द्र मंदिरों में स्वर्णजड़ित पत्थर की कलाकृति का जीवंत चित्रण क्लासिकल-ओडिसी, भरतनाट्यम्, कथकली के खूबसूरत मिश्रण में देखने को मिला ।

भारतीय संस्कृति विदेशी संस्कृतियों को आत्मसात् करते हुये एक लम्बी यात्रा तय कर आज इस मुकाम पर पहुँच चुकी है कि विभिन्न परिवर्तनों की गवाह रही हमारी कला और उसको प्रस्तुत करने के तरीके आज भी हमारे मानस-पटल पर अंकित है…. छाप तिलक सब…. कव्वाली के माध्यम से प्रस्तुत किया गया । यहाँ तक कि मुगलों और ब्रिटिश विचाराधाराओं का समेटे ये पत्थर एक नई रचना का सृजन करने के लिये सज्ज है…. की प्रस्तुति भी मनमोहक रही ।

अन्त में इस महान् राष्ट्र की संस्कृति और सभ्यता पर गर्व करते विभिन्न जातियों और सम्प्रदायों के लोग एवं उनकी आपसी समझ को गुजराती एवं राजस्थानी लोक-नृत्यों के माध्यम से बड़े ही मनमोहक अंदाज़ में प्रस्तुत किया गया जिससे उपस्थित दर्शक अपने-अपने स्थान पर झूमते नज़र आये ।

इससे पहले कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री जगदीश चंद्र, एक्ज़ीक्यूटिव डायरेक्टर एवं सी0ई0ओ0, रीजनल चैनल्स ज़ी मीडिया ने अपने उद्बोधन में छात्र-छात्राओं से अपनी विरासत पर गर्व करने एवं इसको सहेजकर रखे जाने की जोरदार वकालत की ।

इस अवसर पर सुबोध शिक्षा समिति के मानद्मंत्री सुमेर सिंह बोथरा, संगठन मंत्री विनोद लोढ़ा एवं विद्यालय संयोजक विनयचंद डागा ने भी अपने विचार रखे । स्कूल प्रिंसीपल डॉ0 बेला जोशी ने विद्यालय की विकास-यात्रा पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम में प्रयुक्त ऑडियो-विजुअल एवं लेजर शो का प्रभाव हर एक प्रस्तुति में देखते ही बनता था । कुल दस नृत्यों के माध्यम से सजी इस सांस्कृतिक झलकी में मंच सज्जा से लेकर कोरियोग्राफी स्कूल के टीचर्स के मार्गदर्शन में ही सम्पादित की गई । लगभग दस हजार उपस्थित दर्शकों ने इस रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम का जमकर लुत्फ उठाया ।

कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।

कार्यक्रम का डायरेक्षन शिखा भार्गव एवं भारती गांधी का रहा वहीं कॉस्ट्यूम डिज़ाइन नीना अवस्थी एवं अपर्णा काला की रही ।

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